भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग: विक्रम चिप के साथ, एक नए युग की शुरुआत
भारत सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर खड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा “डिजिटल हीरा” कहे जाने वाले चिप्स अब देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन रहे हैं। सरकार द्वारा सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम के तहत उठाए गए कदम और बड़े निवेश ने इस सेक्टर को एक नई दिशा दी है।
सेमीकंडक्टर क्या है? 🤔
सेमीकंडक्टर (अर्धचालक) एक ऐसा पदार्थ होता है जो बिजली का संचालन करता भी है और नहीं भी। इसे आप एक स्मार्ट स्विच की तरह समझ सकते हैं, जो जरूरत के हिसाब से बिजली के प्रवाह को नियंत्रित करता है। यह आमतौर पर सिलिकॉन या जर्मेनियम जैसे तत्वों से बना होता है और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का “मस्तिष्क” कहलाता है।
| प्रमुख उपयोग |
|---|
| स्मार्टफोन और कंप्यूटर: ये चिप्स ही आपके फोन को “स्मार्ट” बनाती हैं। |
| ऑटोमोबाइल: आधुनिक कारों में ये इंजन नियंत्रण से लेकर इंफोटेनमेंट सिस्टम तक में उपयोग होते हैं। |
| घरेलू उपकरण: स्मार्ट टीवी, वाशिंग मशीन, माइक्रोवेव। |
| रक्षा और अंतरिक्ष: मिसाइल, रडार, और उपग्रहों में इनका उपयोग होता है। |
| चिकित्सा उपकरण: एमआरआई मशीन और अन्य डायग्नोस्टिक उपकरण। |
विक्रम चिप: आत्मनिर्भर भारत की ओर एक बड़ा कदम
हाल ही में सेमीकॉन इंडिया 2025 में भारत की पहली पूरी तरह से स्वदेशी 32-बिट माइक्रोप्रोसेसर चिप ‘विक्रम’ को लॉन्च किया गया। इसे इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) की सेमीकंडक्टर लेबोरेटरी (SCL) ने विकसित किया है। यह चिप विशेष रूप से अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्रों के लिए डिज़ाइन की गई है, जो अत्यधिक तापमान और दबाव जैसी कठोर परिस्थितियों में भी काम कर सकती है।
विक्रम चिप ने PSLV-C60 मिशन में सफलतापूर्वक परीक्षण पास किया है, जो इसकी विश्वसनीयता को साबित करता है। यह चिप भारत की विदेशी चिप्स पर निर्भरता को कम करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
भारतीय सेमीकंडक्टर स्टॉक्स: निवेशकों के लिए अवसर
सेमीकंडक्टर उद्योग में तेजी से हो रहे विकास से निवेशकों के लिए कई आकर्षक अवसर पैदा हो रहे हैं। भारतीय शेयर बाजार में कुछ प्रमुख कंपनियां इस क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं।
| कंपनी का नाम | 1 साल का रिटर्न (%) |
|---|---|
| वेदांता लिमिटेड | 47.09 |
| सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस लिमिटेड | 20.69 |
| भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड | 14.22 |
| हैवेल्स इंडिया लिमिटेड | -2.05 |
| एबीबी इंडिया लिमिटेड | -18.09 |
वैश्विक महारथ और भारत की स्थिति
सेमीकंडक्टर निर्माण एक बहुत ही जटिल और खर्चीला काम है। कुछ ही देशों ने इसमें महारथ हासिल की है।
- उत्पादन में अग्रणी देश: ताइवान (TSMC जैसी कंपनियां दुनिया की 60% से अधिक चिप बनाती हैं), दक्षिण कोरिया (सैमसंग), अमेरिका (इंटेल, एनवीडिया) और चीन।
भारत का लक्ष्य भी इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना है। भारत में फिलहाल मुख्य रूप से चिप्स का डिजाइन और असेंबलिंग का काम हो रहा है। हालाँकि, सरकार की सेमीकॉन इंडिया मिशन योजना के तहत अब फैब्रिकेशन (निर्माण) पर भी जोर दिया जा रहा है। गुजरात और ओडिशा जैसे राज्यों में नए सेमीकंडक्टर प्लांट बन रहे हैं।
चुनौतियां और आलोचना
भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग अभी भी शुरुआती दौर में है और उसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है:
- तकनीकी निर्भरता: भारत को उन्नत मशीनरी और सॉफ्टवेयर के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ता है।
- कुशल कार्यबल की कमी: विशेष कौशल वाले इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की कमी है।
- भारी निवेश: एक फैब्रिकेशन प्लांट स्थापित करने में अरबों डॉलर की लागत आती है।
- जल और बिजली की आवश्यकता: चिप निर्माण में बड़ी मात्रा में शुद्ध पानी और निर्बाध बिजली की जरूरत होती है।
इन चुनौतियों के बावजूद, सरकार का मजबूत समर्थन और निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी के साथ भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक मजबूत वैश्विक खिलाड़ी बनने की राह पर है।
भारतीय सेमीकंडक्टर उद्योग का भविष्य
भारतीय सेमीकंडक्टर उद्योग का भविष्य उज्ज्वल है। सरकार का समर्थन, बढ़ती घरेलू मांग और वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। विक्रम चिप जैसी स्वदेशी पहलें भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बना रही हैं। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, वेदांता, सीजी पावर और अन्य कंपनियां इस प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। निवेशकों के लिए यह एक आकर्षक समय है।